Friday, July 22, 2022

अगर परमात्मा, इन्सान होता -सतीश सक्सेना

गरीबों पर बड़ा अहसान होता 
अगर परमात्मा, इन्सान होता !

न जाने कब के हम आज़ाद होते,
भुलाना भी उसे , आसान होता !


पहुँचते उसके दरवाजे भिखारी ,
बगावत का, वहीं ऐलान होता !

दिखाते भूख से,  बच्चे तड़पते 
उसे कुछ भूल का अनुमान होता

नफ़रती अक्षरों को तब तो शायद !
सजा ए मौत का , फ़रमान होता !

Wednesday, July 20, 2022

मिट के ही जायेंगे,गुमां मेरे -सतीश सक्सेना

समझ न पाओगे, बयां मेरे !
मिट के ही जाएंगे, गुमां मेरे !

कैसे दिल से मुझे हटा पाओ 
उसकी हर ईंट पे, निशां मेरे !

तुमने बे घर ,मुझे बनाया था,
कितने दिल में बने, मकां मेरे !

कैसे काबू रखूं , ख्यालों पर 
दिल के अरमान हैं, जवां मेरे !

गर कुरेदोगे, जल ही जाओगे
राख में हैं दबे , जहां  मेरे  !

Tuesday, July 19, 2022

होमियोपैथी, प्रचार शक्ति के अभाव में, एक आश्चर्यजनक प्रभावी मगर उपेक्षित विधा -सतीश सक्सेना

आधुनिक युग में प्रचार साधनों का जिसने भी बेहतर उपयोग कर लिया वही ज्ञानी और समृद्ध माना जाता है ! समाज में अधिकतर लोग लकीर के फ़क़ीर होते हैं जहाँ सब जाते हैं उसी रास्ते जाना सही समझते हैं , प्रमाण के रूप में प्रसाधनिक जैसे फेस पाउडर को लीजिये इसका फायदा गिनाते हैं सुंदरता बढ़ाना , पसीना रोकना , शरीर से बदबू भगाना और हम यह फ़ायदा, बिना सोचे, स्किन के महीन छेद बंद करके पाते हैं जो खुद में एक हेल्थ ब्लंडर है ! 

इसी तरह से विशाल विश्व में स्वास्थ्य सुधार की तमाम विधाएँ प्रचलित रही हैं , जिनको आधुनिक धनवान मेडिकल व्यवसाय ने, प्रचार के जरिये खा लिया , विश्व में न जाने कितनी खूबसूरत स्वास्थ्य विधाएँ या तो लुप्त हो चुकी हैं या दम तोड़ रही हैं ! ताकतवर एलोपैथी ने होमियोपैथी को समझने की बिना कोशिश किये उसे फेथ हीलिंग का दर्जा दे दिया वे यह भूल गए कि जिन जिन एलोपैथिक डॉक्टर्स ने उसे समझने और आजमाने की कोशिश की वे एलोपैथी को छोड़कर , होमियोपैथी को अपना चुके हैं , बहुत कम लोग जानते होंगे कि होमियोपैथी का जनक खुद एक एलोपैथिक डॉक्टर थे ! इससे बड़ा प्रमाण और क्या होगा कि आज विश्व में हजारों एलोपैथिक प्रैक्टिशनर होमियोपैथी के जरिये अपने रोगियों का उपचार करते हैं मगर एलोपैथिक दवा व्यवसाय इसे स्वीकार करने को तैयार नहीं क्योंकि उनके व्यवसाय का अस्तित्व ही खतरे में आ जाएगा क्योंकि होमियोपैथी में कोई बीमारी असाध्य नहीं है जबकि एलोपैथी में तमाम बीमारियों यहाँ तक कि जुकाम का इलाज ही नहीं वे सिर्फ एंटीबायोटिक /स्टेरॉयड का उपयोग कर शरीर की जीवाणुओं को मारकर इलाज करते हैं जिसमें शरीर एक बीमारी से मुक्त होकर अन्य बीमारियों का शिकार हो जाता है ! 

आज से लगभग 42 वर्ष पहले मुझे सर्वाइकल स्पोंडोलाइटिस हुआ था , तमाम एलोपैथिक जांच और इलाज के बावजूद ठीक नहीं हुआ , डॉ विरमानी मशहूर डॉक्टर के अनुसार अब यह बोन डेफ्लेक्शन ठीक होना असंभव है , केवल एक्सरसाइज के जरिये मसल्स मजबूत बनाइये एवं मसल्स कमजोर होने पर अधिक उम्र में कॉलर का उपयोग ताउम्र करना होगा ! उन दिनों रात रात भर दर्द से तड़पता रहता था ! इंफ्रारेड लैंप के जरिये सिकाई करने पर आराम मिलता था मगर बढ़े दर्द के समय इंफ्रारेड लैम्प का अधिक उपयोग करने से गर्दन के पिछले हिस्से में बर्न हो गए थे और स्किन जल कर काली हो गयी थी तब घबरा कर मैंने होमियोपैथी की शरण ली , करोल बाग़ में दो मशहूर डॉक्टर बनर्जी और चटर्जी के पास इलाज कराया जिनके यहाँ लम्बी लाइन में लगने के बाद नंबर आता था ! दो माह में बहुत कम आराम मिला मगर उनकी दुकान से ही लाइन में लगे लगे होमियोपैथी की दो किताबें खरीदी और पढ़ना शुरू किया तो पता चला कि उनकी दी हुई दवाएँ तो होमियोपैथी के मूल सिद्धांत के खिलाफ थीं और इससे मैं कभी ठीक नहीं हो सकता !

अपने जिद्दी स्वभाव के अनुसार मैंने रात रात भर जागकर वो दोनों किताबें ख़त्म कर होमियोपैथी सिद्धांत से अपना इलाज खुद करने का फैसला लिया और अगले दो महीने में पूर्ण स्वस्थ हो गया उसके बाद आज 40 साल बाद भी वह दर्द दुबारा नहीं हुआ !  

होमियोपैथी के जरिये अगर कोई डॉ अपनी रोजी रोटी चलाना चाहता है तब यह बहुत मुश्किल होगा कि वह रोगियों के साथ न्याय कर सके क्योंकि होमियोपैथी में एक रोगी पर पहले दिन ही डॉ को बहुत समय देना होगा वह पूरे दिन में मात्र एक या दो रोगियों का उपचार करने हेतु ही समय निकाल पायेगा जिसमें उसका खर्चा निकलना भी असम्भव होगा अगर वह पूरे दिन में 20 या अधिक रोगियों को ठीक करने का प्रयत्न करेगा तब उसे कम से कम 24 घंटे काम करना होगा जो असम्भव होगा और डॉ अपना खर्चा निकालने को यही करते हैं और वे अक्सर आंशिक तौर पर ही रोगी को ठीक करने में कामयाब होते हैं एवं होमियोपैथी का नाम खराब करते हैं !

होमियोपैथी सिद्धांत के अनुसार संसार में हर रोग का इलाज प्रकृति में उत्पन्न पौधों में छुपा है , उनका विश्वास है कि संसार में जितने प्रकार और व्यवहार के मानव, मानवी हैं उतने ही प्रकार या व्यवहार के पौधें हैं जो जाग्रत ,पूर्ण जीवित और इनसान के आचरण के हैं ! अगर इंसानों और पौधों के स्वभाव और आचरण का सही अध्ययन कर लिया जाए तब रोगी के आचरण के पौधे के रस से बनी दवा , उसी आचरण के इंसान के लिए संजीवनी बूटी का काम करेगी चाहे उस रोगी के रोग का नाम कुछ भी क्यों न हो ! 

ध्यान रहे होमियोपैथी में दवा का नाम नहीं होता , अलग अलग व्यक्तियों में किसी भी बीमारी की दवा, उनके विशेष स्वभाव के अनुसार अलग अलग होगी अतः एक व्यक्ति की कैंसर की कामयाब दवा दूसरे व्यक्ति के कैंसर में काम नहीं आएगी अगर उनका स्वभाव अलग अलग हुआ ! होमियोपैथी रेपर्टरी में मानव के लाखों गुणों का समावेश किया गया है जिससे व्यक्ति विशेष की दवा निकालना संभव है उसके लिए अस्वस्थ इंसान के गुणों का सावधानी से चयन आवश्यक है और असम्भव रोग का इलाज भी ! 

अपने स्वभाव का अध्ययन कर मैंने अपनी होम्योपैथिक संजीवनी की आसानी से तलाश कर ली , फलस्वरूप 68 वर्ष की आयु में भी मैं रोग मुक्त रहता हूँ काश मित्र लोग होमियोपैथी का अध्ययन करने की सलाह मान लें तो मेरे अधिकांश मित्रों का कल्याण होगा उन्हें किसी डॉ के पास जाने की आवश्यकता नहीं होगी ! 
 

Sunday, July 17, 2022

एक शाम जर्मनी की, राज भाटिया के घर -सतीश सक्सेना

विदेश में कोई अपना सा दोस्त मिल जाय तो बल्ले बल्ले हो जाती है , पुराने ब्लॉगर साथी राज भाटिया के घर आज शाम जाना हुआ

, उनकी जिद थी कि आप सपरिवार खाना साथ आकर खाएंगे सो हम लोग लगभग 4 बजे घर से निकल लिए , जर्मनी हाईवे पर हाई स्पीड गाड़ी चलाना आनंद दायक है ! गौरव की बीएमडब्लू 200 km प्रति घंटा की स्पीड पर भी स्टेबल थी, मैं खुद तेज ड्राइवर हूँ फिर भी मैंने उन्हें धीरे चलाने को कहा , इलेक्ट्रिक/ हाईब्रिड कार होने के कारण इसका पिकअप दिमाग को हिला देने वाला था ! 

जर्मनी में मानवीय सुरक्षा के सख्त कानून हैं , मैंने ट्रैन स्टेशन पर SOS साइन के साथ बेहतरीन इंतज़ाम देखे हैं , आकस्मिक हार्ट अटैक के समय यह इंस्ट्रूमेंट जान बचाने में सहायक हैं खतरे में पड़े व्यक्ति को मात्र बटन दबाना है !

राज भाई बेहद मिलनसार इंसान हैं , वे अपने जर्मन विलेज के दरवाजे पर पत्नी सहित इंतज़ार करते मिले, शांत स्वच्छ जर्मन गाँव जहाँ धूल का नामोनिशान नहीं , उम्र दराज लोगों के लिए ऐसी जगह पर रहना एक वरदान है ! चाय नाश्ते के बाद वे हमें गांव घुमाने ले गए , रास्ते में जो भी परिवार दिखे एक दूसरे से आत्मीयता से अभिवादन कर हालचाल पूछते नज़र आये ! 

यहाँ एक चीज हमारे यहां से अलग है घर के मेंटेनेंस से सम्बन्धित हर काम परिवार को खुद करना होता है बाहरी मदद इतनी महंगी होती है कि आम आदमी बर्दाश्त ही न कर सके ! बेटे के घर में सिंक टैप से एक एक बूँद पानी टपकता था जिसे ठीक कराने के लिए 60 यूरो दिए गए जिसमें सिर्फ वॉशर बदलना था सो घर में रहने वाले पेंटिंग, गार्डनिंग से लेकर घर की मरम्मत तक के कार्य खुद करते हैं , इसकी पुष्टि राज की होम वर्कशॉप को देख कर आसानी से हो गयी !

राज भाई बड़े जीवट के इंसान हैं , घर में काम करते समय कोई नहीं कह सकता कि उनके हृदय के चार चार ऑपरेशन हो चुके हैं , मजबूत जीवनी शक्ति , इंसान की मजबूत इच्छा शक्ति पर निर्भर करती है , राज भाटिया इसके जीते जागते उदाहरण हैं , सो आज का दिन सफल हुआ एक बेहतरीन इंसान के साथ !

Saturday, July 9, 2022

सहज मुस्कान , मुक्त हंसी, ही जीवन हैं -सतीश सक्सेना

फेसबुक पर मेरे तमाम दोस्त अपनी 10 वर्ष पुरानी फोटो लगाए रहते हैं , कई मित्र यह जानबूझकर नहीं करते बल्कि उन्हें ऐसा करना अच्छा लगता है सो वे अपने मित्रों को अपना वही आकर्षक रूप दिखाना चाहते हैं जो उनका बेहतरीन था ! मुझे लगता है कि समय के बदलाव चाहे वह समाज में आये अथवा चेहरे पर उन्हें स्वीकार करना चाहिए , अधिक उम्र लोग भी कई बार बेहद आकर्षक लगते हैं , मेरे कई हमउम्र 
महिला एवं पुरुष  फेसबुक मित्र , मुझे बहुत आकर्षक एवं गरिमामय लगते हैं  इतने कि उनकी तारीफ करने का मन करता है !

मेरा विश्वास है कि आकर्षक लगने के लिए चेहरा मोहरा कोई ख़ास रोल नहीं निभाता बल्कि उस चेहरे पर आये भाव , वस्त्र एवं बैकग्राउंड का रोल उतना ही महत्वपूर्ण रहता है ! चेहरे पर आयी उस व्यक्ति की एक सहज और गैर बनावटी मुस्कान किसी का भी दिल जीतने के लिए पर्याप्त है , चेहरे का रंग और बनावट चाहे कुछ भी क्यों न हो अफ़सोस यह है कि मुस्कान में सहजता आजकल दुर्लभ हो गयी है , अपने आसपास के तमाम तनाव के कारण लोग उन्मुक्त हंसी छोड़िये मुस्कराना भी भूल गए हैं !

मैं मूलतः एक कवि व्यक्तित्व हूँ , फोटोग्राफर होने के कारण हँसते खिले चेहरे बहुत अच्छे लगते हैं और खुद भी अपनी हंसी और मुस्कान को कभी थकने नहीं देता जबकि समय के साथ कई मित्रों की मुस्कान फीकी हो गयी या गायब हो चुकी है ! 

अक्सर लोगों की विपरीत परिस्थितियां उनके चेहरे पर आयी उदासी का कारण होती हैं जबकि उन्हें यह तथ्य आत्मसात कर लेना चाहिए कि खुशियां उत्पन्न करने की क्षमता उनके अपने शरीर में हमेशा होती है केवल उस वक्त की सोच हंसती हुई होनी चाहिए कष्ट खुद ब खुद भाग जाएंगे क्योंकि वह एक अस्थायी मानसिक अवस्था है ! अफ़सोस कि हम बहुत कम समय इस पर देते हैं !

लोग अक्सर मुझसे पूछते हैं कि आप 67+ उम्र में दौड़ कैसे पाते हो , मेरा जवाब संक्षिप्त है क्यों कि मेरा दौड़ने का दृढ़ निश्चय , मेरी प्रफुल्ल मानसिक अवस्था लेती है और इस अवस्था को मैं हमेशा ज़िंदा रखता हूँ !
मेरा अनुरोध है कि अपनी बच्चों जैसी हंसी वापस लाइए और बीमारियां भगाइये !

Tuesday, July 5, 2022

मोटापा एक अनचाही समस्या -सतीश सक्सेना

साठ के बाद अधिकतर लोग खुद को वृद्ध मानना और तदनुसार व्यवहार करना शुरू कर देते हैं जिसका परिणाम उनके शरीर पर तत्काल दिखना शुरू कर देता है ! आसपास के लोग उनसे अधिक गंभीरता और संजीदगी को उम्मीद करते हैं , उनके कपड़ों, रहन

सहन एवं भोजन में बदलाव आ जाता है ! अब इस उम्र में क्या ? का दयनीय भाव लिए ये लोग धीरे धीरे आने वाले समय में , अपनी संभावित मृत्यु की और अग्रसर होते हैं और शरीर भी इस दयनीय दशा को स्वीकार करते हुए तेजी से अपना कसाव भूलकर थुलथुल होना शुरू कर देता है !

मेरे रिटायर होने के बाद , पिछले आठ साल में मैंने खुद अपने बेहतरीन मित्रों को असमय मौत के मुँह में जाते देखा है , डायबिटीज, मोटापा और उसके कारण हृदय आघात उसका बड़ा कारण थे ! मैंने साठ वर्ष के बाद कोई और कार्य न करके, अपने कायाकल्प का संकल्प लिया था और धीरे धीरे खुद को रनिंग (हाई इम्पैक्ट एक्सरसाइज ) सिखाना शुरू किया जिसमें सफल रहा और शरीर में अत्यधिक बदलाव महसूस किया और वजन तो घटना ही था ! सुबह सुबह एक घंटे का तेज वाक अथवा रनिंग , इन्सुलिन के प्रति बॉडी सेंसिटिविटी बढ़ाने में बड़ा रोल अदा करती है ! मेरे तमाम रनर दोस्त डायबिटीज को वर्षों पहले विदा कर चुके हैं !

बढ़ते हुए वजन से सबसे बड़ा खतरा हार्ट आर्टरी में खून के थक्के जमने से हृदय पर पड़ता बोझ है जो अधिक उम्र में घातक होता है , अगर आप सौ कदम तेज चलने से हांफ रहे हैं तब आप खुद को खतरे में मानिये , मेरे अपने विचार से साठ वर्ष में साठ और अस्सी वर्ष में अस्सी प्रतिशत आर्टरी ब्लॉकेज संभव है , यही प्रकृति का तरीका है और इस उम्र के बाद हमें स्वयं को जाने के लिए तैयार कर लेना चाहिए ! साठ वर्ष में किया गया मेडिकल ऑपरेशन आपके जीवन को बढ़ाएगा नहीं बल्कि कुछ नयी समस्याएं ही पैदा करेगा सो बेहतर यही होगा कि अंत तक शरीर को फुर्तीला बनाये रखने का प्रयास किया जाए , इससे न केवल ब्लॉकेज कम होगी बल्कि आप शारीरिक , मानसिक बुढ़ापे से भी मुक्ति पाए रहेंगे !

इन बुरे दिनों, हर किसी की शारीरिक एक्टिविटी घटी है घर में लगातार बंद रहने के कारण, बिना मेहनत किये बढ़िया खाने की मात्रा में बढ़ोतरी, बढ़ते वजन का बड़ा कारण रहा ! मेरी खुद का वजन लाख कोशिशों के बाद भी 2 किलो बढ़ा है , हालाँकि इन दिनों मैं अपने देश में बढे  पॉल्यूशन के कारण कम एक्सरसाइज कर पाया सो खाना भी बेहद कम खाया नतीजा अपने अन्य मित्रों के मुकाबले वजन कम बढ़ा उम्मीद है जर्मनी के स्वच्छ वातावरण में अगले तीन माह अधिक दौडूंगा एवं वजन घटाने में सफल रहूँगा !    

अगर आप मेहनत नहीं कर पा रहे तब खाने पर आपका कोई अधिकार नहीं होना चाहिए , केवल एक समय का भोजन करें , सुबह हल्का नाश्ता एवं डिनर शाम को 4 बजे , रात आठ बजे ग्रीन टी के साथ 4 फीके बिस्कुट काफी होंगे ठाठ से जीने के लिए और यक़ीनन वजन कण्ट्रोल रहेगा ! सुबह स्वच्छ हवा में गहरी साँस भरकर छोड़ने की आदत डालें , एवं जब भूख लगे तभी पानी अवश्य पियें , पूरे दिन में 10-12 गिलास पानी आपकी पुरानी मस्ती वापस लाने में सहायता करेगा , शुगर और मिल्क प्रोडक्ट का त्याग सोने में सुहागा होगा !

अंत में , आखिरी बात नए आधुनिक चुस्त खूबसूरत कपडे पहने बिना इसकी परवाह किये कि लोग क्या कहेंगे  ? अपने बालपन को मत खोने दें उसे वापस लाएं नए मित्र और नए शौक बनाने होंगे और आप इस उम्र में जाग्रत बदलाव देखेंगे !   

प्रणाम आप सबको !
 

Sunday, July 3, 2022

म्युनिक की तीखी धूप में 10 km रन -सतीश सक्सेना

आज म्युनिक में बेहद गर्म दिन था 27 डिग्री मगर सूरज की तीखी किरणों के कारण महसूस 32 डिग्री हो रहा था , ऐसे में पहले किलोमीटर दौड़ते हुए ही महसूस हो गया था कि आज दौड़ना आसान नहीं होगा और शर्ट उतारकर दौड़ना शुरू किया इससे पेड़ों की छाया में दौड़ते हुए, हवा के ठंडे झोंके कुछ आराम दे रहे थे ! आखिरी 300 मीटर में एक जर्मन लड़की ने मुझसे आगे निकलने के लिए चिल्लाते हुए तेज दौड़ना शुरू किया तो मैंने खुद को चैलेंज दिया कि हारना नहीं है और पूरी ताकत से दौड़ते हुए अपने से कम से कम 45 साल छोटी इस लड़की को हरा दिया मतलब अभी इतने बुड्ढे नहीं हुए कि बच्चे आगे निकल जाएँ !

बहरहाल 10 km रन 77 मिनट में पूरा हुआ !


Thursday, June 30, 2022

मम्मा की सब बात मान ली और बताओ क्या करना है -सतीश सक्सेना

जूते, मोज़े ,वाटर बोतल
कपडे सारे पहन लिए हैं !
अब पापा खुश हो जाएंगे 
किंडर गार्डन , ले जाएंगे !
दादी की सब बात मानती और बताओ क्या करना है !

शोर मचाना नहीं यहाँ पर 
मम्मा ऑफिस में बैठी हैं !
मेरा इन्तिज़ार करने को , 
चिड़िया भी बाहर बैठी है !
पेपा साथ खेलने जाती और बताओ क्या करना है !

फर्श पे खाना, नहीं गिराऊं 
मुझसे कोई उदास न होगा !
दादी का मैं, अच्छा बच्चा
अब कोई भी बोर न होगा !
मैंने खाना ख़तम कर लिया और बताओ क्या करना है !

खम्मा घणी रोज करता है 
नानी नानू खुश हो जाते !
रोज सवेरे पहन के कपडे 
मम्मा के संग क्रिप्पे जाते 
बाबा की सब बात मानती और बताओ क्या करना है !

बुई प्यार करती है मुझको 
फुफ्फु ने गाना सिखलाये !
पायल कंगन चूड़ी के संग
कपडे और खिलौने लाये !
संग में चूंचूं गाना गाये और बताओ क्या करना है !

Wednesday, May 25, 2022

प्रज्वलित संकल्प लेकर धीमे धीमे दौड़िये -सतीश सक्सेना

रोज सुबह एकाग्रचित्त होकर टहलने / दौड़ने निकलना तभी संभव होगा जब आपमें एक धुन या जिद बन जाए कि मैंने मरते समय तक अपने शरीर को फुर्तीला बनाये रखना है यकीनन बीमारियां आपके खूबसूरत गठे हुए शरीर के निकट नहीं आएँगी , वे सिर्फ सुस्त शरीर के मालिकों को ही ढूंढती हैं !

मेडिकल व्यवसाय से मदद की आशा छोड़कर अपने शरीर की आंतरिक रक्षाशक्ति पर विश्वास रखें , आप जीतेंगे !
साथ कोई दे, न दे , पर धीमे धीमे दौड़िये !
अखंडित विश्वास लेकर धीमे धीमे दौड़िये !

Thursday, May 19, 2022

कहीं गंगा किनारे बैठ कर , रसखान सा लिखना -सतीश सक्सेना

इन दिनों भयंकर गर्मी पड़ रही है , काफी समय से दौड़ना बंद कर, आराम करने की मुद्रा में चल रहा हूँ ! हानिकारक मौसम में शरीर पर नाजायज जोर न पड़े इस कारण यह रेस्ट आवश्यक भी है मगर सम्पूर्ण आराम के दिनों खाने के चयन पर अतिरिक्त सावधानी बरतनी होती है ! अन्यथा ट्रकों के पीछे सही वाक्य लिखा ही रहता है कि सावधानी हटी दुर्घटना घटी !

कल दिन में दो बार खाना खा लिया सुबह 11 बजे और रात 8 बजे , आज सुबह घर से निकलते ही, कल की हुई बेवकूफी पता चल गयी ! बेसन की मोटी रोटी और खुद बनाये हुए स्वादिष्ट दम आलू की सब्जी और छाछ, खाने की कीमत पता चल रही थी साथ ही, मेरे कुछ दुबले पतले मित्रों का हाल में बढ़े हुए वजन का राज भी पता चल रहा था ! सो आज उपवास रखना होगा केवल तरबूज के साथ साथ ही अगले पंद्रह दिन सुबह की चाय और बिस्किट भी बंद ताकि प्रायश्चित्त हो इस लालच का !

लम्बे जर्मनी प्रवास में , सुबह सुबह डिपार्टमेंटल स्टोर में जब अस्सी से ऊपर की महिलाओं पुरुषों को अपना सामान साईकिल पर लादकर साइकिल ट्रेक पर तेजी से जाते देखता तो अपने देश के बुजुर्गों की दयनीय दशा अवश्य याद आती थी कि हम मानसिक तौर पर आज भी कितने अविकसित हैं !

जब तक हूँ तब तक कुरीतियों अनीतियों और अन्याय के खिलाफ लिखना तो होगा इस विश्वास के साथ कि लिखा अमर है और रहेगा ताकि जाते समय खुद को यह कष्ट न हो कि हम संक्रमण काल में भी निष्क्रिय रहे !

इस हिन्दुस्तान में रहते , अलग पहचान सा लिखना !
कहीं गंगा किनारे बैठ कर , रसखान सा लिखना !

दिखें यदि घाव धरती के, तो आँखों को झुका लिखना
घरों में बंद, मां बहनों पे, कुछ आसान सा लिखना !

विदूषक बन गए मंचाधिकारी , उनके शिष्यों के ,
इन हिंदी पुरस्कारों के लिए, अपमान सा लिखना !

किसी के शब्द शैली को चुराये मंच कवियों औ ,
जुगाडू गवैयों , के बीच कुछ प्रतिमान सा लिखना !

व्यथा लिखने चलो तब, तड़पते परिवार को लेकर
हजारों मील, पैदल चल रहे , इंसान पर लिखना !

तेरे मन की तड़प अभिव्यक्ति जब चीत्कार कर बैठे
बिना परवा किये तलवार की, सुलतान सा लिखना !

Friday, May 13, 2022

68 वर्ष में मेहनत के बाद का सुख -सतीश सक्सेना

आज पूरे घर और कार की सफाई धुलाई के बाद का संतोष चेहरे पर साफ़ दिखता है ! मुझे याद है जब मैं 30-35 का था तब वृद्ध लोगों को आदर भाव से देखता था और सोंचता था कि इनकी मदद करनी चाहिए जबकि आज मैं सोचता हूँ कि इन जवानों की मदद करनी चाहिए !
प्रणाम आप सबको !

अकर्मण्यता की आदत से, है कितना लाचार आदमी !
जकड़े घुटने पकड़ के बैठा , ढूंढ रहा उपचार आदमी !

Wednesday, May 11, 2022

मॉर्निंग वाक मैडिटेशन -सतीश सक्सेना

आपकी कॉलोनी एवं परिचितों में एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं होगा जो वाक न करता हो , 40-45 के होते होते हर व्यक्ति हृदय रोग के भय से यंत्रवत वाक करना शुरू कर देता है , और हर चौथे व्यक्ति को इसके बावजूद भी हार्ट अटैक होता है !

कुछ लोग वाक नहीं करते जिसका कारण वे अपने जोड़ों के दर्द को बताकर अपनी मजबूरी बता देते हैं सच्चाई यह है कि शुरू में आलस्य के कारण वाक को तरजीह नहीं दी और अब शरीर इस योग्य नहीं रहा कि वे वाक कर सकें !

वाक करने का समय बेहद महत्वपूर्ण होता है , उसे दोस्तों के साथ अपनी कहानियां सुनाते हुए करना, कोई फल नहीं देगा बल्कि उस वक्त अपने शरीर के हर अंग से बातें करना होता है ! उठते गिरते क़दमों , हाथों, और सांसों में एक तारतम्य होना आवश्यक है उस वक्त इन अंगों और मस्तिष्क में लगातार समन्वय रहना चाहिए और भरपूर ऑक्सीजन मस्तिष्क तक पहुंचती रहनी चाहिए ! चलते हुए मस्तिष्क इन अंगों को लगातार मैसेज भेजता रहे और उन्हें विश्वास दिलाये कि वे ठीक और सुचारु रूप से कार्य कर रहे हैं और करेंगे ! आपस में उठती हुई इन विचार तरंगों का सम्प्रेषण, उन अंगों पर ध्यान केंद्रित रखते हुए लगातार होना चाहिए ! यह शक्तिशाली विचार सम्प्रेषण सुस्त और ख़राब होते अंगों को सक्रिय और स्वस्थ कर देगा !

सबसे पहला योगी कोई भी हुआ होगा मगर उसे योग सिखाने वाला कोई नहीं था , अकेले सुनसान जगह पर एकाग्रचित्त होकर बैठकर, सांसों पर ध्यान केंद्रित कर शरीर के अंगों तक भरपूर ऑक्सीजन पहुंचाना सीख लिया और इन्ही पर नियंत्रण कर बॉडी कोर के अंगों को कम्पन देना आया , यही योग था जिससे उन्हें शारीरिक शक्ति के साथ बौद्धिक शक्ति की भी प्राप्ति हुई !

जिस प्रकार हम लगातार एक ही भोजन से ऊब जाते हैं उसी तरह से शरीर को भी एक जैसा लगातार व्यवहार पसंद नहीं उसे वह आदत में ढाल लेता है और उसका फायदा उठाना बंद कर देता है ! सो लगातार एक जैसा भोजन और वाक में भी बदलाव आवश्यक है और लगातार करते रहना चाहिए ! बचपन से फिक्स आईडिया का त्याग करना आना चाहिए इससे मन में फुर्ती और प्रसन्नता आएगी !

साथ कोई दे, न दे , पर धीमे धीमे दौड़िये !
अखंडित विश्वास लेकर धीमे धीमे दौड़िये !

दर्द सारे ही भुलाकर,हिमालय से हृदय में
नियंत्रित तूफ़ान लेकर, धीमे धीमे दौड़िये !

जाति,धर्म,प्रदेश,बंधन पर न गौरव कीजिये
मानवी अभिमान लेकर, धीमे धीमे दौड़िये !

जोश आएगा दुबारा , बुझ गए से हृदय में
प्रज्वलित संकल्प लेकर धीमे धीमे दौड़िये !
तोड़ सीमायें सड़ी ,संकीर्ण मन विस्तृत करें
विश्व ही अपना समझकर धीमे धीमे दौड़िये !

समय ऐसा आएगा जब फासले थक जाएंगे
दूरियों को नमन कर के , धीमे धीमे दौड़िये !

Monday, April 25, 2022

अब और न कुछ कह पाऊंगा, मन की अभिव्यक्ति मौन सही !

अब और न कुछ कह  पाऊंगा, मन की अभिव्यक्ति मौन सही !
कुछ लोग बड़े आहिस्ता से
घर के अंदर , आ जाते हैं !
चाहे कितना भी दूर रहें ,
दिल से न निकाले जाते हैं !
ये लोग शांत शीतल जल में
तूफान उठाकर जाते हैं !
सीधे साधे मन पर, गहरे 
हस्ताक्षर भी कर जाते हैं !
कहने को बहुत कुछ है लेकिन, अब यह अभिव्यक्ति मौन सही  !

इस रंगमंच की दुनिया में
गहरी चोटें खायीं हमने !
कितनी ही रातें नींद बिना   
किस तरह गुजारीं हैं हमने 
जब दिल पर गहरे जख्म लगे 
कुछ आकर मरहम लगा गए 
इन प्यारों द्वारा ही कड़वे 
अवशेष मिटाये जाते हैं !
अहसान न अपनों का होता सो यह अभिव्यक्ति मौन सही !

कुछ चित्रकार आसानी से 
निज चित्र, उकेरे जाते हैं !
आहिस्ता से मुस्कानों के 
गहरे रंग , छोड़े जाते हैं !
पत्थर पर निशाँ पड़े कैसे 
अनजाने, दिल में कौन बसा 
अनचाहे स्मृति चिन्ह बने 
मेटे न मिटाये , जाते हैं !
कहने को जाने कितना है पर यह अभिव्यक्ति मौन सही !

Saturday, April 16, 2022

सबसे आवश्यक स्वास्थ्य सूत्र -सतीश सक्सेना

-मानव के लिए सबसे आवश्यक उदासी और अकेलेपन से मुक्ति है इसके साथ साथ उसे बंधन मुक्त होकर हंसना सीखना होगा ! प्रसन्नचित्त मन से ही संकल्प लेना आसान होगा अन्यथा सब प्रयास विफल होंगे !

-मृत्युभय निकालना होगा अगर ऐसा न कर सके तो बढ़ती बीमारियों का बोझ कम न होकर बढ़ता ही जाएगा आपकी आंतरिक जीवन रक्षा शक्ति को मजबूत बनाने का एक ही तरीका है कि आप बीमारियों को महत्व न दें उनपर ध्यान न दें और ऐसा निडर होकर करें प्राकृतिक तैर पर ठीक होने का विश्वास बनाये रखें कि आपकी आंतरिक रक्षा शक्ति बेहद ताकतवर है और प्रकृति द्वारा शरीर को सौ वर्ष जीवित रखने के लिए डिजाइन्ड है जबकि मेडिकल साइंस के तथाकथित रक्षक खुद को इतने वर्ष नहीं बचा पाते हैं !

-आलस्य को दूर रखने के लिए दिन भर खुद को एक्टिव रखें नए शौक अपनाएँ इससे मन में उत्साह बना रहेगा !

-नकारात्मक विचार आपको कुछ भी करने नहीं देंगे , बुरा विगत भुलाकर आगत का स्वागत नए उत्साह से करें !

-खुद को बड़प्पन मुक्त करें, झिझक त्याग मित्रों का उन्मुक्त स्वागत हाथों को फैलाकर करें , अपने बचपन को अगर वह खो गया है तो दुबारा बापस लाएं , बड़प्पन और आदर सम्मान की भूख आपको बूढ़ा जल्द बनाएगी यह याद रखें !

Wednesday, April 13, 2022

विवाह गीत -सतीश सक्सेना

जिससे रिश्ता जुड़ा था 
जनम जन्म से  
द्वार पर आ गए , 
आज  बारात ले !
उनके आने से, सब 
खुश नुमा हो गया !
नाच गानों से , घर भी चहक सा गया !

पर यह आँखें मेरी, 
संग नहीं दे रहीं 
हँसते हँसते न जाने 
छलक क्यों रहीं  ?
आज बेटी   चलीं, 
अपना दर छोड़कर
घर नया चुन लिया अपना घर छोड़कर !

आज माता पिता 
भाई बहना सभी 
कर रहे स्वागतें 
इक नयी आस में !
जाओ बहना सजाओ 
नया आशियाँ !
हम सभी की शुभाशीष है साथ में !

रचनी होगी तुम्हें , 
विश्व सर्वोत्तमा 
एक हंसती कलाकृति
 हमारे लिए !
हाथ फैलाये हंसती 
कृति विश्व की 
ऎसी  सौगात देना , हमारे लिए  !


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